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मुलाकात हुई थी

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज फिर खड़ा हूं, उसी दहलीज पे,
        
                                                    
                            
जहां से शुरुआत हुई थी,

क्या हसीन पल थे, वो
जब तुमसे मुलाकात हुई थी।

मुस्कुराहट पे फिदा थे, हम
एक कशिश में कैद थे, हम,

तुम्हारे घनी जुल्फों के साए में, कभी रात हुई थी,

क्या हसीन पल थे, वो
जब तुमसे मुलाकात हुई थी।

भाग कर आते थे, हम तेरे मोहल्ले में
तू खड़ी रहती थी, दो तल्ले में,

कंखियों से, तुझे निहारा करते थे,
तेरे कुचे में हम, दिन गुजारा करते थे,

तेरी नजरों से भी, कभी इश्क की बरसात हुई थी,

क्या हसीन पल थे, वो
जब तुमसे मुलाकात हुई थी।

ना कभी बात हुई, ना खत ही लिखा,
आखिरी बार जो आया, तो तू ना दिखा,

सुनी गलियों ने बताया, मुझे
तू हो गई, किसी के साथ, विदा,

तेरे मोहल्ले में, मैं आज भी आता हूं
तेरे दो तल्ले पे, अपनी नजर गड़ाता हूं,

खुश रहे तू सदा, मेरा क्या है,
मेरी तो जिंदगी की, सबसे बड़ी मात हुई थी,

क्या हसीन पल थे, वो
जब तुमसे मुलाकात हुई थी।
एक वर्ष पहले
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