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मेरा महबूब

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बातें करता है, खूब लच्छेदार
        
                                                    
                            
नजरों से करता है, वो मीठे वार

बहकी बहकी सी चाल, बेतकल्लुफ है अंदाज
बातों बातों में, बिना बात, हो जाता नाराज़,

इत्र की खुश्बू सा महकता जिस्म
वो अपने आप में है, एक नायाब तिलिस्म,

हर अदा उसकी है, वल्लाह, क्या खूब
सर्द झोंका सा हवा का है, मेरा महबूब।

सादगी ऐसी की, शर्माएं फूल
जुल्फ ऐसी की गड़े दिल में शूल,

पत्ता पत्ता भी सहम जाता है
जब वो बागो में निकल जाता है

दमकते चेहरे पे, इज़ वही
मेरे महबूब से बढ़कर, कोई चीज नहीं

दुआ में वो है, वही मेरा मंसूब
सर्द झोंका सा हवा का है, मेरा महबूब।
एक वर्ष पहले
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Rabindra Aman

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