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कवि प्रार्थना

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखना चाहूं, लिख ना पाऊं,
        
                                                    
                            
एक भी कोई पंक्ति,

मेरे अवलंबन तुम हो, प्रभु
तुम ही मेरी शक्ति।

जन कल्याण के लिए लिखूं मैं,
ना धन से हो आसक्ति,
गुरु भी तुम हो, मैत्री तुमसे,
वरद करो अपनी भक्ति।

प्रभु कृपा बिन पत्ता हिले ना,
कली से कोई पुष्प खिले ना,
आदि देव तुम, तुच्छ प्राणी मैं,
यही हृदय की उक्ति,

मेरे अवलंबन तुम हो, प्रभु
तुम ही मेरी शक्ति।

धारा प्रवाह लिखता रहूं तब तक,
एक भी सांस है बाकी जब तक,
कारज पूर्ण होते ही मुझको,
प्रभु दे देना मुक्ति,
मेरे अवलंबन तुम हो, प्रभु
तुम ही मेरी शक्ति।
2 वर्ष पहले
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