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जीवन नहीं सरल

Manish Pandey

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                            जीवन नहीं सरल है,
        
                                                    
                            
कड़वा एक गरल है,

मृगतृष्णा में फंसे है, सब
अचरज बड़ा विरल है,
अन्तर्दृष्टि बाधित हो तो,
ज्ञान पुंज भी लगता छल है,

जीवन नहीं सरल है।

होना वही जो भाग्य बदा है,
नियम बड़ा अटल है।

आने वाला कल है, मिथ्या,
मिथ्या बिता कल है,
जग में जिसने धुनी रमाई,
वो मूढ़, बेअकल है।

किसी की काया भीमकाय है,
कोई अति निर्बल है,
उदर किसी का भरा हुआ है,
क्षुधा से कोई विकल है,

जीवन नहीं सरल है,
कड़वा एक गरल है।

गति एक है, राजा, रंक की,
चित फिर क्यूं चंचल है,

जीवन नहीं सरल है
कड़वा एक गरल है।

जग है बस एक कंटक शैय्या,
अग्नि सामान भूतल है

जीवन नहीं सरल है....
2 वर्ष पहले
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