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जीवन गीत

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहूँ लिखना कुछ गहरा सा,
        
                                                    
                            
जिसे पड़े कोई, पर समझो तुम,
मैं लिखी, प्रभु की एक कविता,
मेरा भावार्थ समेटो तुम ।।

मै हूँ जैसे सरिता समान ,
मेरा भी कोई उदगम है,
बहना मेरा जीवन निश्चय,
और सागर मेरा संगम है,
बन सरिता सबके कष्ट हरूं
बन सागर मुझे समेटो तुम।
मैं लिखी प्रभु की एक कविता ....

सावन के आते ही देखो,
शाखों पे फूल चले आते,
कण कण में भर देते खुशबू
हर छड़ जीवन का महकाते
बनकर के कोई पुष्प गुश्च
खुशबू को मेरे समेटो तुम ।।
मैं लिखी प्रभु की एक कविता ....


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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