चाहूँ लिखना कुछ गहरा सा,
जिसे पड़े कोई, पर समझो तुम,
मैं लिखी, प्रभु की एक कविता,
मेरा भावार्थ समेटो तुम ।।
मै हूँ जैसे सरिता समान ,
मेरा भी कोई उदगम है,
बहना मेरा जीवन निश्चय,
और सागर मेरा संगम है,
बन सरिता सबके कष्ट हरूं
बन सागर मुझे समेटो तुम।
मैं लिखी प्रभु की एक कविता ....
सावन के आते ही देखो,
शाखों पे फूल चले आते,
कण कण में भर देते खुशबू
हर छड़ जीवन का महकाते
बनकर के कोई पुष्प गुश्च
खुशबू को मेरे समेटो तुम ।।
मैं लिखी प्रभु की एक कविता ....
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