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जीवन संगिनी

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोयल सी आवाज हो जिसकी
        
                                                    
                            
मन निर्मल नदियां जैसी,
संगिनी हो तो ऐसी।

जिसकी आभा से रौशन हो
घर का कोना कोना,
चंद्र मुकुट सा मस्तक हो
दिल हो खारा सोना,
लज्जाशील हो, मृदु भाषिणी
मंदिर के घंटी जैसी,
संगिनी हो तो ऐसी।

पाकशास्त्र में निपुण हो
धर्मपरायण नारी हो,
करुणामयि हृदय से हो
शिष्ट आचार धारी हो,

विलंब करो ना, वरण करो
मिले जो नारी ऐसी,
कवि ह्रदय सदा पुकारे
संगिनी हो तो ऐसी।
3 वर्ष पहले
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