जो कहता कोई, जीत गया,
तो मान लो उसकी बात!
हारने वाले लोगों की,
होती है, यही औकात!
जीतने वाले दंभ ना भरते,
जीत का दावा कभी न करते,
जो हारा है, वही गाएगा,
लोगों को पकड़, सुनाएगा!
वो बैठ नहीं सकता कभी, शांत चित,
जिसका हो गया हो, कोई अहित!
यही हार, जीत का अंतर है,
जो हारा, भ्रमित, निरंतर है!
- मृदुल मनीष