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प्रेम पत्र

Manish Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रिय ....
        
                                                    
                            
मेरी यह तीव्र अकांछा है कि
तुम मेरी प्रियतमा के रूप मे व्रहद अनुराग प्रदान करो,
हो सकता है कि मै आपके अनुरूप ना होऊं
परन्तु यह भी सही है कि
फूल भौंरो के बिना अच्छे नहीं लगते,
तथापि हे अनुरागिनी
तुम मुझे आपके गुलाब जैसे स्वरूप
और अतिस्नेह से भरे ह्रदय पर
मुझे थोडा सा स्थान प्रदान कर
अपनी प्रतिमा को मुझसे जोडने का चिंतन करें
जिससे हमारे जीवन मे भी
गुलाब जैसी सुगन्ध हो,
हम आपकी सभी भावनाओं का
सदैव आदरपूर्वक प्रतिपालन करेंगे



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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