प्रिय ....
मेरी यह तीव्र अकांछा है कि
तुम मेरी प्रियतमा के रूप मे व्रहद अनुराग प्रदान करो,
हो सकता है कि मै आपके अनुरूप ना होऊं
परन्तु यह भी सही है कि
फूल भौंरो के बिना अच्छे नहीं लगते,
तथापि हे अनुरागिनी
तुम मुझे आपके गुलाब जैसे स्वरूप
और अतिस्नेह से भरे ह्रदय पर
मुझे थोडा सा स्थान प्रदान कर
अपनी प्रतिमा को मुझसे जोडने का चिंतन करें
जिससे हमारे जीवन मे भी
गुलाब जैसी सुगन्ध हो,
हम आपकी सभी भावनाओं का
सदैव आदरपूर्वक प्रतिपालन करेंगे
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