विज्ञापन

सड़क - सुरक्षा जीवन - रक्षा

Manish Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तैयार हुए गाड़ी पर जब , माता बोली सुन लो भईया ।
        
                                                    
                            
जाना रोड पे धीरे –धीरे ,कहीं फिसल न जाए गाड़ी का पहिया।
भईया बोले ठीक है मैया बात आपकी मानूंगा,
कहे रोड पर कोई कुछ भी पर उसे नहीं मैं मानूंगा ।
फिर भईया ने गाड़ी को धीरे से स्टार्ट किया ,
एक्सीलेटर को खींच दिया गाड़ी को आगे बढ़ा लिया
गांव रोड को छोड़ के भैया शहर रोड पर आते हैं
गाड़ी स्पीड बड़ा-बड़ा हीरोपंती दिखलाते हैं
एक नवयुवक भैया के पास में आकर बोला है
तुमने तो 80 (speed) तक छोड़ा हमने तो 100 तक छोड़ा है
फिर भैया बोले बात बड़ी तुमने क्या हमको बतलाई
फिर सारी बातें भूल गए गाड़ी की स्पीड बढ़ाई
आगे से वाहन आते हैं भैया डर भी ना खाते है
जब युवक व आगे निकल तो ओवरटेक कर जाते हैं
जब पीछे उसको छोड़ दिया फिर पीछे मुड़कर देख रहे हैं
आगे से गाड़ी आई जब भैया जा उसमें घुस गए
कुछ देर बाद आंखें खोली फिर होश में भैया आते हैं
जिससे यह दौड़ लगा रहे उसको फिर वहां न पाते हैं
थे वो जैसे घर से निकले खुद को वैसे ना पाते हैं
ऊपर से नीचे तक खुद को खून से लथ– पथ पाते हैं
निज आसपास के लोगों ने भैया का हाथ बटाया है
108 किया डायल फिर एंबुलेंस बुलाया है
भैया को उसमें बिठलाकर हॉस्पिटल दिया पहुंचाई है
यह खबर सुनी जब मां ने तो वह दौड़ी - दौड़ी आई है
पहले तो उसको पुचकारा फिर उसकी डांट लगाई है
हमने तुमसे जो बोला था तुमने उसको ना माना है
फिर उसका फल तुमको देखो कैसा मिला बेगाना है
माध्यम कविता का लेकर के मैं आप सभी को बतलाऊं
पालन करो यातायात का यही आप सभी को समझाऊं।।
11 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile