हर तरफ है अंधियारा,
निरंतर बदलना है इशारा ।
मुझमें आशा की लौ है जलती,
मशाल गौरव की है मचलती l
कंधों पर है ज़िम्मेदारियाँ ,
कुछ करने की है तैयारियाँ l
बिन रुके थके हर वर्ष,
चलते रहना है संघर्ष l
मुझमें बहुत है नादानियाँ,
कुछ हो जाती है गलतियाँ l
उस पर दुनिया की हँसी-ठिठोली,
तन-मन से करती आँख-मिचौली l
भीतर सूना है एक मकान,
गीत बनाने का है संज्ञान l
अहंकार की है वेदना,
शून्यता ही है चेतना l
मैं एक युवा हूँ........