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वर्षा ऋतु

Mamta Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बह रही ठंडी ठंडी शीतल आनंदमई हवा,
        
                                                    
                            
वर्षा ऋतु के बादल पानी रहे बरसा।

हो रही है वर्षा भारत के हर कोने की ओर ,
बारिश में खुश होकर जंगल में नाच रहे मोर ।

नीचे रहे खेल गा रहे बच्चे हर गली गली ,
बरसात में खिल गई चांदनी ,सदाबहार की कली कली।

खेतों पेड़ पौधों जीव जंतुओं की बारिश ने मिटा दी प्यास ,
इस संसार को मिल गयी उल्लास, उमंग और नहीं आस।

वर्षा के साथ लगने लगी मक्का ,गन्ना, और लैया,
जल से भर कर हो गए तृप्त तालाब पोखर और नदियां।
एक वर्ष पहले
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