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वर्षा ऋतु

                
                                                         
                            बह रही ठंडी ठंडी शीतल आनंदमई हवा,
                                                                 
                            
वर्षा ऋतु के बादल पानी रहे बरसा।

हो रही है वर्षा भारत के हर कोने की ओर ,
बारिश में खुश होकर जंगल में नाच रहे मोर ।

नीचे रहे खेल गा रहे बच्चे हर गली गली ,
बरसात में खिल गई चांदनी ,सदाबहार की कली कली।

खेतों पेड़ पौधों जीव जंतुओं की बारिश ने मिटा दी प्यास ,
इस संसार को मिल गयी उल्लास, उमंग और नहीं आस।

वर्षा के साथ लगने लगी मक्का ,गन्ना, और लैया,
जल से भर कर हो गए तृप्त तालाब पोखर और नदियां।
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एक वर्ष पहले

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