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शायरी: कलम ही रहने दो

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे हाथों में कलम ही रहने दो,
        
                                                    
                            
खंजर उठाने की आदत नहीं,
मेरे उलझनों को मेरा ही वक्त मिलने दो,
किसी और को सुलझाने की इजाजत नहीं।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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