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शायरी: कलम ही रहने दो

                
                                                         
                            मेरे हाथों में कलम ही रहने दो,
                                                                 
                            
खंजर उठाने की आदत नहीं,
मेरे उलझनों को मेरा ही वक्त मिलने दो,
किसी और को सुलझाने की इजाजत नहीं।
-ममता तिवारी
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6 महीने पहले

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