संस्कार रूपी गहनों से
सजे मनुष्यों में
जो निखार होते हैं
लाजवाब होते हैं
संस्कार और शिक्षा
दोनों खूबसूरती में
चार चांद लगा देते हैं
दोनों मनुष्य के शोभा
और असली विभूति है।।
-ममता तिवारी