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राधा जी की:.......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राधा जी की,
        
                                                    
                            
झुकी आंखें--
कान्हा जी के,
मन में कहर--
ढाती है।
इश्क कब,
किसी के रोके--
रुक पाती है।
मीठी मीठी यादें,
राधा मन में,
सजाती है।
मुरली की,
मधुर ध्वनि--
धड़कन को,
तेज कर जाती है।
मोहनी मूरत--
जब मन में,
बस जाती है।
राधा सखियों से,
सब हृदय की बात--
बताती है।
कान्हा ने मन मोहे,
मन बावली--
हो जाती है।
सुनूं बासुरी की,
आवाज--
पांव न रुक पाती है।।
5 महीने पहले
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