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ना मंजिल की तलाश है:......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना मंजिल की तलाश है
        
                                                    
                            
ना सफलता की चाह है
हमें तो कविता बस,सिर्फ
तुमसे ही लगाव है......।।

अक्सर तन्हाई में थाम लेती हो हाथ,
मुश्किलों में भी तुमने रिश्ता को निभाया है।।

जब जब मैं आवाज देती हूं तुम्हें,
तुम्हें इकरार करते हुए हमने पाया है।।

सब रिश्ते छोड़ देते हैं साथ,
तुम्हें अंधेरों में भी उजाले की तरह पाया है।।

जब जब टूटी हूं मैं,
तुमने हौसला देते हुए गले से लगाया है।।

थक जाते हैं सभी राहों में,
तुमने थके हुए को भी उठाया है।।

हर गमों की दवा हो तुम
डूबते का सहारा हो तुम
पता नहीं इतना इल्म,
तुमने कहां से पाया है।।
-ममता तिवारी
 
3 महीने पहले
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