ना मंजिल की तलाश है
ना सफलता की चाह है
हमें तो कविता बस,सिर्फ
तुमसे ही लगाव है......।।
अक्सर तन्हाई में थाम लेती हो हाथ,
मुश्किलों में भी तुमने रिश्ता को निभाया है।।
जब जब मैं आवाज देती हूं तुम्हें,
तुम्हें इकरार करते हुए हमने पाया है।।
सब रिश्ते छोड़ देते हैं साथ,
तुम्हें अंधेरों में भी उजाले की तरह पाया है।।
जब जब टूटी हूं मैं,
तुमने हौसला देते हुए गले से लगाया है।।
थक जाते हैं सभी राहों में,
तुमने थके हुए को भी उठाया है।।
हर गमों की दवा हो तुम
डूबते का सहारा हो तुम
पता नहीं इतना इल्म,
तुमने कहां से पाया है।।
-ममता तिवारी
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