आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ना मंजिल की तलाश है:......

                
                                                         
                            ना मंजिल की तलाश है
                                                                 
                            
ना सफलता की चाह है
हमें तो कविता बस,सिर्फ
तुमसे ही लगाव है......।।

अक्सर तन्हाई में थाम लेती हो हाथ,
मुश्किलों में भी तुमने रिश्ता को निभाया है।।

जब जब मैं आवाज देती हूं तुम्हें,
तुम्हें इकरार करते हुए हमने पाया है।।

सब रिश्ते छोड़ देते हैं साथ,
तुम्हें अंधेरों में भी उजाले की तरह पाया है।।

जब जब टूटी हूं मैं,
तुमने हौसला देते हुए गले से लगाया है।।

थक जाते हैं सभी राहों में,
तुमने थके हुए को भी उठाया है।।

हर गमों की दवा हो तुम
डूबते का सहारा हो तुम
पता नहीं इतना इल्म,
तुमने कहां से पाया है।।
-ममता तिवारी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर