मनुष्यों के मन के अंदर झांके कैसे
किसमे कितना जहर भरा भापें कैसे
मानव से मानव को जलन होता क्यों
मानव ही मानव का दुश्मन होता क्यों
मानव को मानव से प्रीत क्यों नहीं होते
आंखे नम देख आंखे नम क्यों नहीं होते
मानव मन मानव के लिए निर्मल क्यों नहीं
मानव मानव को अच्छे से समझते क्यों नहीं
मानव को मानव से प्यार होता क्यों नहीं
मानव मानव के लिए खड़ा होता क्यों नहीं
मानव मानव विचार आपस में मिलते क्यों नहीं
मानव मानव एहसास खुद में जुड़ते क्यों नहीं
मानव का मानव के लिए दिल धड़कता क्यों नहीं
एक दूसरे की आपबीती सुनाई देती क्यों नहीं
मानव मानव आपस में जंग करते क्यों रहते हैं
एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों बने रहते हैं
मानव को मानव से युद्ध करके मिलते क्या है
एक दूसरे के परिवार की खुशियां छिनते क्यों है
मानव ही मानव का संहार किया करते क्यों है
मानव ही मानव का तिरस्कार करते क्यों है
मानव का मानव से अपनापन होना चाहिए
एक दूसरे के लिए दिल में मर्म दर्द होने चाहिए
मानव को मानवता की मिसाल देने चाहिए
एक दूसरे के सुख दुःख में शरीक होने चाहिए।।
-ममता तिवारी