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मानव को मानव से:........दोहे

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मनुष्यों के मन के अंदर झांके कैसे
        
                                                    
                            
किसमे कितना जहर भरा भापें कैसे

मानव से मानव को जलन होता क्यों
मानव ही मानव का दुश्मन होता क्यों

मानव को मानव से प्रीत क्यों नहीं होते
आंखे नम देख आंखे नम क्यों नहीं होते

मानव मन मानव के लिए निर्मल क्यों नहीं
मानव मानव को अच्छे से समझते क्यों नहीं

मानव को मानव से प्यार होता क्यों नहीं
मानव मानव के लिए खड़ा होता क्यों नहीं

मानव मानव विचार आपस में मिलते क्यों नहीं
मानव मानव एहसास खुद में जुड़ते क्यों नहीं

मानव का मानव के लिए दिल धड़कता क्यों नहीं
एक दूसरे की आपबीती सुनाई देती क्यों नहीं

मानव मानव आपस में जंग करते क्यों रहते हैं
एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों बने रहते हैं

मानव को मानव से युद्ध करके मिलते क्या है
एक दूसरे के परिवार की खुशियां छिनते क्यों है

मानव ही मानव का संहार किया करते क्यों है
मानव ही मानव का तिरस्कार करते क्यों है

मानव का मानव से अपनापन होना चाहिए
एक दूसरे के लिए दिल में मर्म दर्द होने चाहिए

मानव को मानवता की मिसाल देने चाहिए
एक दूसरे के सुख दुःख में शरीक होने चाहिए।।
-ममता तिवारी
5 महीने पहले
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