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मन को खूब भाई रेल

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झुक झुक झुक झुक आई रेल
        
                                                    
                            
मन को खूब भाई रेल
चलो देखने चलते है रेल
कर ले हम सभी आपस में मेल

मम्मी पापा जी से बोलेगें
हम सब दुनियां देखेंगे
मुन्नी बोली दादी जी से
दादी जी देखिए आई रेल

रेल के डिब्बे जोड़े हुए हैं
सभी लोग उसमे चढ़े हुए हैं
एसी स्लीपर जेनरल डिब्बे आपस में बांटे हुए हैं
एक दूसरे में सटे हुए हैं

सब स्टेशन पर रूकती है
अच्छी अच्छी चीजें बिकती है

घूमने हम सब जाएंगे
छुट्टियों मे खुशियां मनाएंगे
बहुत सुंदर रेलगाड़ी है
मन को खूब भाती है

तेजी से चलती है
मन को खूब हरती है

झुक झुक झुक झुक चलती रेल
चलो चले हो जाए न देर

आ गई है देखो रेल
कपड़ों का बैठा ले मेल
खूबसूरत लगेंगे ढेर
वहां खाएंगे चीजें ढेर

भेलपुरी, मिठाई सुंदर पेड़ा
नाशपाती संतरा सेव केला
खूब सुंदर हाेगा सवेरा
खुशियां भरपूर मिलेगा

खुशी खुशी हम आयेंगे
फिर स्कूल जाएंगे
दोस्तों को बताएंगे
उनको अगले साल ले जाएंगे
 
8 महीने पहले
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