झुक झुक झुक झुक आई रेल
मन को खूब भाई रेल
चलो देखने चलते है रेल
कर ले हम सभी आपस में मेल
मम्मी पापा जी से बोलेगें
हम सब दुनियां देखेंगे
मुन्नी बोली दादी जी से
दादी जी देखिए आई रेल
रेल के डिब्बे जोड़े हुए हैं
सभी लोग उसमे चढ़े हुए हैं
एसी स्लीपर जेनरल डिब्बे आपस में बांटे हुए हैं
एक दूसरे में सटे हुए हैं
सब स्टेशन पर रूकती है
अच्छी अच्छी चीजें बिकती है
घूमने हम सब जाएंगे
छुट्टियों मे खुशियां मनाएंगे
बहुत सुंदर रेलगाड़ी है
मन को खूब भाती है
तेजी से चलती है
मन को खूब हरती है
झुक झुक झुक झुक चलती रेल
चलो चले हो जाए न देर
आ गई है देखो रेल
कपड़ों का बैठा ले मेल
खूबसूरत लगेंगे ढेर
वहां खाएंगे चीजें ढेर
भेलपुरी, मिठाई सुंदर पेड़ा
नाशपाती संतरा सेव केला
खूब सुंदर हाेगा सवेरा
खुशियां भरपूर मिलेगा
खुशी खुशी हम आयेंगे
फिर स्कूल जाएंगे
दोस्तों को बताएंगे
उनको अगले साल ले जाएंगे
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