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कुछ शब्द मन की खिड़की से:.....

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ शब्द मन की खिड़की से
        
                                                    
                            
रोज़ झांकते हैं
पन्नों पर बिखरने के लिए

दिल की धड़कन बेताब रहती है
कागज़ से कुछ कहने के लिए
दिल की धड़कन बेकरार रहती है
कागज़ पर कुछ लिखने के लिए

कलम मचलती रहती है
शब्दों को सजाने के लिए
कुछ जज़्बात बेचैन हो उठते हैं
मन की कैद से बाहर निकल
खुली हवा में सांस लेने के लिए

कुछ एहसास तड़पते रहते हैं
स्याही की खुशबू पाने के लिए
कुछ भावनाएं भीतर ही भीतर
उछलतीं रहतीं हैं
मन की नगरी से निकल
दिल तक पहुंचने के लिए

कुछ शब्दों के सुमन
मन में खिल ही जाते हैं
खुशबू बिखेरने के लिए

कुछ शब्द मुस्कुरा ही उठते हैं
सबके जीवन में ख़ुशी के रंग
और मुस्कान भरने के लिए।।
-ममता तिवारी
3 घंटे पहले
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