कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं
तू तो सब कुछ लिखती है
तेरी शक्ति से अनभिज्ञ नहीं हूं मैं
कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं
जीवन के उजाले तुम्हीं से
विद्यालय और कार्यालय तुम्हीं से
तुम्हारी स्याही की खुशबू चारों दिशा में फैली है
कलम तेरी महिमा से ज्ञान का ज्योत जले
शब्दों को सजाती है
ज्ञान और गरिमा बढ़ाती है
एक-एक शब्द जोड़कर कल्पनाओं में चार चांद लगाती है
कलम तू अनुभूतियों को शक्ति देती है
यह बात कैसे भूलूं मैं
कलम तेरी शक्ति से अनभिज्ञ नहीं हूं मैं
कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं.......।।
-ममता तिवारी