आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कैसे लिखूं मैं:......

                
                                                         
                            कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं
                                                                 
                            
तू तो सब कुछ लिखती है
तेरी शक्ति से अनभिज्ञ नहीं हूं मैं
कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं
जीवन के उजाले तुम्हीं से
विद्यालय और कार्यालय तुम्हीं से
तुम्हारी स्याही की खुशबू चारों दिशा में फैली है
कलम तेरी महिमा से ज्ञान का ज्योत जले
शब्दों को सजाती है
ज्ञान और गरिमा बढ़ाती है
एक-एक शब्द जोड़कर कल्पनाओं में चार चांद लगाती है
कलम तू अनुभूतियों को शक्ति देती है
यह बात कैसे भूलूं मैं
कलम तेरी शक्ति से अनभिज्ञ नहीं हूं मैं
कलम तेरी महिमा कैसे लिखूं मैं.......।।

-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर