विज्ञापन

जो दिल व्यथित न हो:.....दोहे

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख मानव पीर जो दिल व्यथित न हो।
        
                                                    
                            
तो उस दिल को दिल कहे कैसे कोई।।

देख किसी की आंखे नम, आंखे न रोई।
तब ये देख इंसानियत भी शर्मिंदा हुई।।

प्यार हो इंसानों से इंसानों को खुदा खुश होंगे।
देख धरा पर नफरत वे भी नाखुश होंगे।।

कर काम कुछ ऐसा मानवता के काम आए।
अन्यथा यह जीवन अकारथ ही रह जाए।।

नेक काम करके ही आत्मा में तृप्ति आए।
दूसरों का पीर मिटाकर दिल खूब सुकून पाए।।
-ममता तिवारी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile