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जो दिल व्यथित न हो:.....दोहे

                
                                                         
                            देख मानव पीर जो दिल व्यथित न हो।
                                                                 
                            
तो उस दिल को दिल कहे कैसे कोई।।

देख किसी की आंखे नम, आंखे न रोई।
तब ये देख इंसानियत भी शर्मिंदा हुई।।

प्यार हो इंसानों से इंसानों को खुदा खुश होंगे।
देख धरा पर नफरत वे भी नाखुश होंगे।।

कर काम कुछ ऐसा मानवता के काम आए।
अन्यथा यह जीवन अकारथ ही रह जाए।।

नेक काम करके ही आत्मा में तृप्ति आए।
दूसरों का पीर मिटाकर दिल खूब सुकून पाए।।
-ममता तिवारी
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एक महीने पहले

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