क्या भरोसा
कल का
मिट्टी से बने,
इस जीवन का
मंजर बदल जाता
हर क्षण का,
जीत लो दिल
सबका।
शुक्रिया अदा करो
रब का
मानव रूप में,
जीवन दिए
इस बात का,
ईश्वर जैसे,
माता-पिता मिले,
इस सौगात का
जीत लो दिल
सबका।
ईश्वर ने सुंदर
जीवन दिया है
किसी भी चीज में,
नहीं कमी किया है
सबका रूपरेखा एक है
सबका यहां से,
जाना तय है।
मानव-मानव में,
नफरत कैसा
क्या फिर मिलेगा?
जीवन ऐसा।
इतिहास उठा कर
देखो तुम,
जीवन मंथन
करो तुम।
बैर से कहां?
भला हुआ है
मन के तराजू में,
तौलों तुम।
बुझा दो मन से,
नफरत का दिया
प्रेम ने ही सबका
कल्याण किया।
सबके जीवन में,
खुशियां बिखेर,
जीत लो दिल सबका।।
-ममता तिवारी