आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जीत लो दिल सबका:....

                
                                                         
                            क्या भरोसा
                                                                 
                            
कल का
मिट्टी से बने,
इस जीवन का
मंजर बदल जाता
हर क्षण का,
जीत लो दिल
सबका।
शुक्रिया अदा करो
रब का
मानव रूप में,
जीवन दिए
इस बात का,
ईश्वर जैसे,
माता-पिता मिले,
इस सौगात का
जीत लो दिल
सबका।
ईश्वर ने सुंदर
जीवन दिया है
किसी भी चीज में,
नहीं कमी किया है
सबका रूपरेखा एक है
सबका यहां से,
जाना तय है।
मानव-मानव में,
नफरत कैसा
क्या फिर मिलेगा?
जीवन ऐसा।
इतिहास उठा कर
देखो तुम,
जीवन मंथन
करो तुम।
बैर से कहां?
भला हुआ है
मन के तराजू में,
तौलों तुम।
बुझा दो मन से,
नफरत का दिया
प्रेम ने ही सबका
कल्याण किया।
सबके जीवन में,
खुशियां बिखेर,
जीत लो दिल सबका।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर