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इसकी आंखें:.......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिखने का मन भी है
        
                                                    
                            
पास में कलम भी है
पर मन में अजीब हलचल है
कोई तकलीफ में हो तो
चलती नहीं कलम है
लिखूं तो लिखूं कैसे
उलझन में मन है
कैसे लिखूं मैं कविता दिल से
कलम ही साथ नहीं दे रही मन से
लग रहा आजकल ये भी गमगीन सी है
उदासी में मेरी हंसती हुई कलम भी है
क्योंकि इसकी आंखें नम सी है
लिखूं तो लिखूं कैसे
उलझा हुआ मन है।।
-ममता तिवारी
एक महीने पहले
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