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आज की द्रौपदी: खुद ही...

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            श्रेष्ठजन सब बैठे हुए
        
                                                    
                            
पति भी समक्ष थे
सभा में उपस्थित बड़े-बड़े दिग्गजों के
होंठ क्यों? मौन थे

आवाज लगा रही थी द्रौपदी जी
आंखें सबकी झुकी हुई
भरी सभा में नारी क्यों?
विवशता की आंसू रोती रही

भीष्म पितामह जी जैसे यशस्वी
पांच पांडव जैसे महाबल शाली पति
हे कृष्ण हे कृष्ण की गुहार क्यों?
लगा रही थी द्रौपदी जी

बीच सभा में चीर हरण की पीड़ा
नारी एक सहती रही
पांव आपके आगे न बढ़े
बताओ आप सब कौन?थे

विदुर जी जैसे नितिज्ञ,उपस्थित
आचार्य द्रोणाचार्य,कृपाचार्य जैसे महा ज्ञानी
याचना की भीख क्यों?
मांग रही एक नारी

ना राम आएंगे बचाने
ना श्याम आएंगे बचाने
आज की द्रोपदी
तू खुद ही अपना चीर हरण
बचा ले

राम राम चिल्लाएगी
हे कृष्ण कृष्ण गुहार लगाएगी
यह दुनिया मौन है
मौन ही रह जाएगी

घोर कलयुग है
कोई नहीं आएगा बचाने
आज की द्रौपदी
खुद अपना सम्मान बचा ले

बरसों से होता आया यही
हर युग में यही होगा
नारी को नीचा दिखाने का
नहीं छोड़ा जाता कोई मौका

नहीं आते भगवान श्री कृष्ण जी
द्रोपदी जी भरी सभा में अपमानित होती रहती
अपना से लेकर पराया तक
बैठी दुनिया तमाशा देखती रहती

पति को परमेश्वर मान
हर युग में नारी ने पूजा
नारी की रक्षा के लिए
प्रकट होता है कोई दूजा

वन गई सीता माता जी को
महर्षि वाल्मीकि जी ने आश्रय दिया
चीरहरण की महा त्रासदी से
श्री कृष्ण जी ने बचा लिया

ना अपना आएगा बचाने
ना पराया आएगा बचाने
आज की द्रौपदी खुद
अपना स्वाभिमान बचा ले।।
-ममता तिवारी
6 महीने पहले
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