खिलते हैं रोज सुमन
बहते हैं रोज पवन
निकलते हैं रोज सूर्य भगवान
हम क्यों करें आराम
हमें भी अपने हिस्से के
कर्तव्य निभाने होंगे
आलस्य से दूरी बनानी होगी
हिम्मत,हौसलों को अपनाने होंगे
खुद के लिए और दूसरों के लिए
दीपक बन जलने होंगे
एक क्षण नहीं समय बेकार करेंगे
ऊर्जा,उत्साह को साथ लेंगे
दृढ़ता से काम लेंगे
जब जीवन ही एक संग्राम है,
तो योद्धा बनकर लड़ना ही
हमारा काम है
जीवन एक संग्राम है,
तो फिर हम भी महासंग्राम करेंगे
हार हो या जीत हो
कभी न मलाल करेंगे
कर्म को ही पूजा मान
सिर्फ दिल से काम करेंगे
कर्म से ही प्रीत है
कर्म करने से कभी न डरेंगे
हमारे पास हौसले की जो पूँजी है
हम उसका इस्तेमाल करेंगे
फल चाहे जो भी मिले
कभी ना हम फिक्र करेंगे
जब भी कोई जिक्र करेंगे
तो आगे ही आगे बढ़ने की जिक्र करेंगे
सतत् निरंतर प्रयास करेंगे
कभी ना हम दूसरों पर आस करेंगे
जीवन है हमारा तो
हम खुद पर ही विश्वास करेंगे
अपने विश्वासों से हम
हर इम्तिहानों को पास करेंगे
कुछ मिले ना मिले
परिश्रम करके ही
खुश हो लेंगे
मेहनत कभी बेकार नहीं होती
इस बात पर यकीन है
तजुर्बा मिले या फल मिले
दोनों ही अनमोल है
फल मिलते ही क़दम रुक जाते हैं
फल नहीं मिलेंगे तो हम और आगे बढ़ेंगे
रुकेंगे हम कभी नहीं
ना बैठकर कभी आह भरेंगे
जीवन चलने का नाम है
हम नित्य-नित्य आगे बढ़ते रहेंगे।।
-ममता तिवारी