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ऐ ज़िंदगी

mamta singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी गैरों से जोड़ देती है अटूट नाता,
        
                                                    
                            
कभी अपनों से ही जुदा कर देती है।
क्या शिक़ायत करूॅ॑ तुझसे ऐ ज़िंदगी,
तू है कि हर सीख को ख़ुदा कर देती है।
एक वर्ष पहले
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