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मेरी मां

Mamta Mannu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने हर गम को कागज पे बयां करती हूं ,
        
                                                    
                            
न जाने क्यों आज सोचा कि माँ ,आज
तेरी दास्ता भी बयान कर दूँ ।
वैसे तो मेरी हर एक साँस तेरे प्यार और दुलार की मोहताज है ,
मगर आज सबके सामने अपनी जिंदगी ,
तेरे नाम कर दूँ ।

हे !माँ , मैंने अपने ही आँखों के सामने जब जब तुझे रोता देखा है ,
माँ ,तब उस पल अपने इस दिल को ,
धड़कने से रोका है ।

माँ मुझे यद् तो नहीं वो मंजर बचपन का ,
लेकिन ,लोगो से तेरी दर्द भरी बातें सुन इस दिल को ,
तड़पने से रोका है ।

चाहत यही है मेरी माँ तुझे उन तकलीफों के बदले ,
तू भूल जाये सारे गम ,इतनी खुशिया दू मैं ,
माँ ऐसे ही सपने सोने से पहले ,
हर रात को बुनती हूं मैं ।

तेरे ही मुख सुना है मैंने ,
अपने एक बेटे को खोकर जब जना था मुझको ,
रोई भी तो थी तू कितना कि खोया बेटा पायी बेटी ।

मुझे भेजकर गोंद में तेरी ,
उपकार रब ने किया था मुझपर ,
जन्म लेते ही था चढ़ा बुखार ,
चढ़ा था तब मुझको पानी का
बोतल ।

बार -बार सुना हैं, उस वक्त तूने मेरे लिए खाना पीना,
दिया था छोड़ ।

सारा दिन मेरी सलामती के लिए दुआएं मांगती रहती थी ,
रब से जिद करती थी कि उठा ले मुझको ,
लेकिन बेटी को मेरे ठीक कर दे तू ।

अपनाया तूने माँ मुझको ,सारे जहाँन ने मुख मोड़ लिया था ,
फिर भी अपने प्यार से इस बिटिया को सींच बड़ा किया ।

इस बीच बड़ा संघर्ष रहा ,
गैरों का नहीं अपनों का ही हाथ रहा ,
सब कुछ सहते माँ न जाने कैसे तूने खुद को ढाल लिया ।

दिल में मेरे है अरमान इतने तेरी जीवन गाथा लिखने की
शब्द ,पेज ,स्याही ,ख़त्म हो सकती है और साथ ही
जीवन लीला मेरी ,परंतु

ख़त्म नहीं होगी वो बातें जो लिखना है इस दिल को,
मेरी प्यारी माँ तेरी अमर
कहानी ।

 
3 महीने पहले
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Dn Chaubey

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