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मिला नहीं सुकून

Mamta Khurana

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी खुद से कभी तकदीर से
        
                                                    
                            
मिला नही हमें सुकून जहे नसीब से

आया नहीं खुद पर यकीं कभी
मात देते हमें आये सभी
कहें हम क्या अपनी वफाओं की तस्वीर से
अक्श बंधा सा दिखता है जंजीर से

यूँ तो तोड़ देते शायद हम बंधन सभी
पर अपने से ही जुदा ना हो पाए कभी
ना जाने और क्या होना बाकी है अभी
मुश्किले दौर से ना निकल पाएं हम कभी

राहत -ए-दौर भी आएगा कभी
आस ना तोड़ ए दिल उम्मीद से
खुशी का लम्हा हो के ना हो
मत डुबोना खुद को आँसुओं के सैलाब से

टीस सी उठती है जो सीने में कभी कभी
होता है ये क्योंकि दर्द भी मिला है करीब से

कभी खुद से कभी तकदीर से
मिला नही सुकून हमें ज़हे नसीब से

ममता खुराना
2 वर्ष पहले
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