कभी खुद से कभी तकदीर से
मिला नही हमें सुकून जहे नसीब से
आया नहीं खुद पर यकीं कभी
मात देते हमें आये सभी
कहें हम क्या अपनी वफाओं की तस्वीर से
अक्श बंधा सा दिखता है जंजीर से
यूँ तो तोड़ देते शायद हम बंधन सभी
पर अपने से ही जुदा ना हो पाए कभी
ना जाने और क्या होना बाकी है अभी
मुश्किले दौर से ना निकल पाएं हम कभी
राहत -ए-दौर भी आएगा कभी
आस ना तोड़ ए दिल उम्मीद से
खुशी का लम्हा हो के ना हो
मत डुबोना खुद को आँसुओं के सैलाब से
टीस सी उठती है जो सीने में कभी कभी
होता है ये क्योंकि दर्द भी मिला है करीब से
कभी खुद से कभी तकदीर से
मिला नही सुकून हमें ज़हे नसीब से
ममता खुराना
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