विज्ञापन

क्या खोया क्या पाया

Mamta Kanaujia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी के इस सफर में
        
                                                    
                            
क्या खोया क्या पाया
इस पर गणना करना
कितना मुश्किल है
सबसे मूल्यवान समय को खोया
जो हर पल हर क्षण बीत रहा
खेल-खेल में आईं जवानी
और बुढ़ापा आवाज दे रहा
कितना बेफिक्र हुआ
करता था वक्त तब,
अब मौत की आहट सुन रहा,
अपनों के खो जाने का ग़म से
वीरानी में जीवन बीत रहा।
जिनको पाया उनसे उलझन
और रूसवाई मिली
महफ़िल पाने की ख्वाहिश में
सिर्फ और सिर्फ तन्हाई मिली।
रूह-रूहानी हो चली है
क्या लिख पायेंगे
ये खोने पाने के झमेले
मसान तक जायेंगे।
जीवन के इस भाग दौड़ में
क्या क्या याद रखेंगे हम
पाप पुण्य हैं पाये कितने
अब उसकी गिनती करना है,
आगे के शुभ कर्म हो अपने
यही प्रभू से विनती करना है।

ममता कनौजिया
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile

Parul Rustagi

1 कविता

View Profile