विज्ञापन

माँ और खुदा

Mamta Grover

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुदा भी जब-जब
        
                                                    
                            
अपनी सब रचनाओं को
जाँचता होगा,
'माँ ' उसकी सर्वोत्तम रचना,
जरूर यही आँकता होगा,

माँ है तो परिवार है रोशन,
माँ है तो संसार है रोशन,
माँ है तो, है बेफ़िक्र खुदा ,
नहीं है माँ खुदा से जुदा ,

कभी-कभी करता होगा
खुदा भी अपनी
इस रचना पे गुमाँ...
और सोचता होगा
काश! मैं भी धरती पर होता,
और मेरे संग होती मेरी माँ,
कभी-कभी अपने से भी बड़ा
अपनी इस रचना को
मानता होगा.....
माँ बिना इस धरा पर
नहीं सुखद है जीवन
ज़रुर यह जानता होगा
ज़रुर यह मानता होगा....

- ममता ग्रोवर
11 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile