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मंच की गरिमा

M. Ayub

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंच था, माइक था, कैमरा था,
        
                                                    
                            
बस तहज़ीब कहीं खो गई।
हाथ बढ़ा जब हिजाब की ओर,
तो सत्ता अपनी औक़ात भूल गई।
-अयूब निसार
8 महीने पहले
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