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मेरा मन

Laxmi Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन मेरा प्रतिपल स्वप्न है संजोता।
        
                                                    
                            
यादों की स्मृतियों से आँचल को है भिगोता।।
कभी यह खुश होकर चित्त को प्रफुल्लित कर देता।
कभी यह जीवन को व्यथित कर देता।।
निशदिन यह नव-नव उड़ानें भरता।
जीवन को स्वर्णिम यह कर देता।।
न जाने क्या-क्या विचार ये सोचता ।
फिर उनकी माला ये पिरोता।।
कभी यह गहन चिंतन में खो जाता ।
कभी यह हर्षित होकर रो भी जाता।।
नयनों को ये खूब रिझाता।
कंठ में भी मीठे स्वर ये भर देता।।
कभी यह धरा की गहराईयों में उतर जाता ।
कभी ब्रह्मांड की ऊँचाईयों को छू जाता।।
नयनों को निराले ये अंदाज दिखाता।
अभिनय के गुण सिखला जाता ।।
इसने है कई स्वप्न सजाएँ।
जी को जो खूब लुभाएँ।।
इसकी कल्पनाएँ है सोच से परे।
जो मेरे स्वप्न हैं साकार करें।।

 
2 घंटे पहले
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