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राम-रहीम

kumari anamika

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंदिर मस्जिद करता रहा बन पाया न कोई,
        
                                                    
                            
ना तू ही पूरा रहा ,ना आधा रह पाया कोई और,
मन्दिर मस्जिद तोड़ा फिर भी अमन-खुशी ना आयी,
जो घर बनाये बिगड़े का कोई खुशहाली ही खुशहाली होय,
राम-रहीम दिन-रात रटे फिर भी चैन ना होय ,
भूखे को भोजन कराएं प्यासे को पानी पिलाये ,
फिर बेचैनी काहे को होय
 
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4 वर्ष पहले
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