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जीवन संघर्ष है

Kumar Manish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठो चलो आगे बढते रहो।
        
                                                    
                            
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

पराजय कोई विकल्प नहीं है,
जीत का कोई जादुई मंत्र नहीं है।

आलस्य निराशा त्याग तुम,
जी जान से कोशिश करते रहो।
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

मेहनत कभी व्यर्थ नहीं होता,
संघर्ष बिना जीवन का अर्थ नहीं होता।

रंग लायेगी हर मेहनत एक दिन,
बस निरंतर लक्ष्य का पीछा करते रहो।
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

दृढ़ निश्चय से क्या नहीं होता,
पत्थरों को चीर कर है झड़ना बहता।

प्यास सफलता की होगी पूरी,
अग्नि जिगीषा की प्रज्ज्वलित करते रहो।
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

कौन है जो कभी गिरा नहीं,
हारा वोही जो गिर के फिर उठा नहीं।

आसमां भी झुकेगा तेरे पुरुषार्थ के आगे,
यूं जुनून की हद से गुज़रते रहो।
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

उठो चलो आगे बढते रहो।
जीवन संघर्ष है लड़ते रहो।।

-कुमार मनीष "कौशल" 


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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