विज्ञापन

ये धरती हिंदुस्तान की

Kuldeep Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जाति-धर्म मे बंट नही सकती,
        
                                                    
                            
दुश्मनों से झुक नही सकती,
ये भूमि है स्वाभिमान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।

लहरों से अड सकती है,
तूफानों से भिड सकती है,
ये मिट्टी है बलिदान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।

सबको ये अपना माने,
सबके मन की ये जाने,
ये जननी है सम्मान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।

सनातन धर्म की पालक यही,
मानवता की अराधक यही,
ये तपस्थली 'श्रीराम' की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।

सब धर्मों को मान दिया,
संस्कृतियों को सम्मान दिया,
ये जननी विश्व महान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।

कुलदीप ठाकुर
मथुरा(उ.प्र)


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Priyanshu Saini

1 कविता

View Profile

Anil Kumar

4214 कविताएं

View Profile

Bhupendra Kumar

8 कविताएं

View Profile

N manglam

371 कविताएं

View Profile

Ashutosh Tomar

25 कविताएं

View Profile