जाति-धर्म मे बंट नही सकती,
दुश्मनों से झुक नही सकती,
ये भूमि है स्वाभिमान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।
लहरों से अड सकती है,
तूफानों से भिड सकती है,
ये मिट्टी है बलिदान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।
सबको ये अपना माने,
सबके मन की ये जाने,
ये जननी है सम्मान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।
सनातन धर्म की पालक यही,
मानवता की अराधक यही,
ये तपस्थली 'श्रीराम' की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।
सब धर्मों को मान दिया,
संस्कृतियों को सम्मान दिया,
ये जननी विश्व महान की,
ये धरती हिंदुस्तान की।।
कुलदीप ठाकुर
मथुरा(उ.प्र)
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