पितृपक्ष में पितरों के लिए,
तमाम तरह के अनुष्ठान,
तर्पण श्राद्ध गयाभोज जैसे,
अनेक धार्मिक अनुष्ठानों से,
उनकी आत्मशांति हेतु ,
जगह जगह आयोजन,
आयोजित किए जाते हैं।
सोचने वाली बात है,
जिन्दा पितरों की बात करें,
बहुत से लोग मुंह फेर लेते हैं,
ना उनके लिए सम्मान है,
ना ही बात करने का समय,
और हां सवाल जवाब अलग से,
काश ! हम समझ सकते,
जिन्होंने हमें जिन्दगी दिया,
उनके लिए जीवन का ,
कुछ समय निकालकर,
सुख दुःख में सहारा बनते।
सुख दुःख में सहारा बनते।।
-कुलदीप शुक्ला