आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जिन्होंने हमें जिन्दगी दिया

                
                                                         
                            पितृपक्ष में पितरों के लिए,
                                                                 
                            
तमाम तरह के अनुष्ठान,
तर्पण श्राद्ध गयाभोज जैसे,
अनेक धार्मिक अनुष्ठानों से,
उनकी आत्मशांति हेतु ,
जगह जगह आयोजन,
आयोजित किए जाते हैं।
सोचने वाली बात है,
जिन्दा पितरों की बात करें,
बहुत से लोग मुंह फेर लेते हैं,
ना उनके लिए सम्मान है,
ना ही बात करने का समय,
और हां सवाल जवाब अलग से,
काश ! हम समझ सकते,
जिन्होंने हमें जिन्दगी दिया,
उनके लिए जीवन का ,
कुछ समय निकालकर,
सुख दुःख में सहारा बनते।
सुख दुःख में सहारा बनते।।
-कुलदीप शुक्ला
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर