विज्ञापन

सहरा की सराब

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सहरा की सराब 
        
                                                    
                            
गजल पढ़ना मेरे बस की बात नहीं है,
गजल लिखना भी नहीं आता,
बस कभी कभी गुन गुना लेता हूं,
जब तुम सामने होती हो,
कोशिश करता हूं तुम्हे पढ़ने की,
कभी गजल लगती हो, कभी कविता,
कभी प्यार के प्यारे से अफसाने,
हमेशा परेशां रहता हूं,
तेरी पल पल बदलती तस्वीर से,
सहरा की सराब सी बहलाती हो हरदम,
सकून की जिंदगी जीना चाहता हूं,
तुम पर कुछ लिखना चाहता हूं,
तुम मेरी गजल बन जाओ,
मेरे पास आओ,
मैं गुनगुनाना चाहता हूं.
कुल भूषण
31.03.23
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile