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हम तुम बरसात में

Kulbhushan Choudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम तुम बरसात में
        
                                                    
                            
दो प्रेमी एक छाते के नीचे भीग रहे बरसात में,
महसूस करें अहसास लेकर हाथ को हाथ में,

बारिश बहार में जब बादलों की कड़कड़हाट दे सुनाई,
उससे पहले ही ग़ाज़ गिर जाती है कहीं पास में,

मन को कैसे रखें काबू जब यौवन ले अंगड़ाई,
मौसम-ए-बहाराँ में फूल सब महके साथ में,

बिरहा के गीत कहीं दूर से जब कानों से टकराए,
इक दूजे के दिल की धड़कन कानों में पड़े तब पास में,

गाज़ की गर्जन बरसात का बूंदे किसी संगीत से कम नहीं,
दो प्रेमी जब तड़प उठें विसाल - ए - यार बरसात में.
 
एक वर्ष पहले
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