एक गजल:चुपके चुपक मिल गए दो दिल
चुपके चुपक मिल गए दो दिल किसी को खबर नहीं,
दो अनजाने बन गए इक जान मगर किसी को खबर नहीं,
उम्र के आखिरी पड़ाव में हम आ गए चुपके से,
दिल में बाकी है कहीं बचपन इस पर कोई असर नहीं,
भेड़ की खाल में.... बैठे रहते हैं यहां पर भेड़िए,
कब किस को लपक लेंगे किसी को खबर नहीं,
असमाजिक तत्व फिरते हैं यहां बेधड़क कहीं भी,
किसी समाज का या सरकारी कानून का इन को डर नहीं....