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कातिल निगाहें

Kritendra Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निगाह उठे तो सुबह, झुके तो शाम हो जाए
        
                                                    
                            
अगर तू मुस्कुरा भर दे तो कत्लेआम हो जाए
जरूरत ही नहीं तुझको किसी की जिंदगी में आने की
अगर तू ख्वाब में भी आ जाए तो मौत का इन्तजाम हो जाए

जब भी चाहते हो नया यार बना लेते हो
मुझ को किस जुर्म की सजा देते हो
बन सवार के जो निकलती हो मर जाता हूँ
तुम मेरी मौत के हालात बना देते हो


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8 वर्ष पहले
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